Time-out

We must take time-out sometimes and spend time with ourselves.
We normally take our self for granted without realizing how much we need us.

Time-out

Time-out

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Quality time

Morning started very badly, when I realized that its 9:30 AM and I am too late to start for our weekend Cricket. Past 2 weeks were very busy and I was not getting enough rest, so finally my body given up and trust me I did not listen when the alarm ringed and when Rajeev called me twice this morning.

Spent some quality time with Keith this evening and hilarious part was that all the time he was not aware that it was my birthday today. Purpose of this outing with was to learn something new and explore of my new lens 17-40mm F/4.0 L and thanks to him both purposes were solved. So kind of him…

We have visited a Shuang Lin Monastery at Toa Payoh, I requested him to go to some Buddhist temples first and later in the evening we can go to front of Sands, (Same place as last week). At Monastery I was mostly using my 50mm F-1.8 due to limited lights. Here are few which I have selected –

A handle

A handle

A Bonsai

A Bonsai

A Lotus Bud

A Lotus Bud

We spent later part of evening in front of sands, at the same jetty where I have visited last week, took many shots but I was unable to repeat the same shot as last week because of a ferry which just docks there all the time. Posting here is one of Sands again –

The Sands

The Sands

Learned new tricks of setting right exposure from Keith, a lot of thanks to him for his time and teaching me tricks… 🙂

Canon EF 17-40mm f/4.0 L USM

My mentor of photography and friend Keith guided that its time to get a better lens and recommended “EF 17-40mm F/4.0 L USM”, so bought it. It costs me almost same as my 1000D kit :D, but worth buying. Now need to expertize it before I start for my India trip… feeling very excited to shoot with this… hopefully will be shooting tomorrow also, will post if anything comes up good… just to make a try, taken “St. Andrew’s Cathedral” at city hall.  The most beautiful part of it is its exposure of the shaded area :)…

St. Andrews` Cathedral

St. Andrews` Cathedral

… और चाभी खो जाये

पिछला परिक्षण सफल होता सा लग रहा है, इस लिए ये ब्लॉग हिंदी मे लिखा रहा हूँ|

अभी कुछ दिनों पहले हिंदी दिवस था और भाग्यवश पिछले कुछ दिनों से ही मै गूगल पे इलाहाबाद के मित्रो से हिंदी मे ही chat भी कर रहा था| आज सोचा चलो एक ब्लॉग हिंदी मे लिखने का प्रयास किया जाये|

कल शाम की बात है, अंशु और मै भारत जाने के बारे में बातचीत कर रहे थे, जिस कमरे में हम बैठे थे उसका ताला ठीक नहीं है, इशू ने खेल खेल में दरवाजा बंद कर दिया, कमरे में अंशु, इशू और मै रह गए और सिर्फ आशी बाहर बैठक मे रह गयी| हम कमरे के भीतर होने के बाद भी दरवाजा नहीं खोल पाए, इस प्रयास में ताले की हालत और खराब हो गयी और बाहर आशी का रोना शुरू  हो गया| हमने आशी को समझाने का प्रयास किया की पडोसी को मदद के लिए बुला ले पर घबराहट मे कुछ भी नहीं कर पाई, एक तीन साल की बच्ची से क्या अपेक्षा की जा सकती है |

अब हम भीतर के कमरे मे बंद थे और आशी बैठक मे अकेले रह गयी, हमे डर था कही आशी घर से दूर ना चली जाये इसलिए हम उसको दिलासा देते हुए शांत रहने को कह रहे थे| अंशु और मुझे कुछ सूझ नहीं रहा था, अंततः अंशु ने अपनी एक मित्र को फ़ोन किया, जो घर से थोड़ी दूर पे ही रहती है| उसके आने पर यह पता चला की आशी ने घबराहट मे घर से बाहर निकालने के दोनों दरवाजे बंद कर लिए थे, जिसकी वजह से अब कोई घर मे भी नहीं आ सकता था, हमने आशी को किसी तरह समझा कर बाहर का दरवाजा खुलवाया जिससे मित्र घर मे आ सके| हमारा भाग्य अच्छा था की घर की चाबी बैठक मे ही थी, जिससे मित्र ने थोडे प्रयास के बाद दरवाजा खोल लिया| इस पूरे प्रकरण मे लगभग १ घंटे का समय लग गया और हम सब पूरी तरह से परेशान हो गए|

दरवाजा खुलने के तुरंत बाद ही मैने उसका ताला खोल के निकाल दिया, जिससे दुबारा ऐसी परिस्थिती ही पैदा न हो 🙂

मजे की बात ये है जिस समय ये सब हो रहा था, मुझे “और चाभी खो जाये …” गाना याद आ रहा था 😀

आशा है आप सब को ये ब्लॉग पसंद आयेगा |